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तमिलनाडु में विजय सरकार के विश्वासमत से पहले AIADMK में बगावत, पार्टी ने जारी किया व्हिप, एक्शन की चेतावनी

 Published : May 12, 2026 10:44 pm IST,  Updated : May 12, 2026 10:47 pm IST

AIADMK में बगावत के संकेत नजर आने लगे हैं। पार्टी के करीब 30 विधायकों के अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) सरकार को समर्थन देने की घोषणा करने की खबरों से सियासी हलचल तेज हो गई। वहीं पार्टी की ओर से सख्त एक्शन लेनेे की चेतावनी दी गई है।

AIADMK- India TV Hindi
ओआईएडीएमके नेताओं की मीटिंग Image Source : PTI

चेन्नई: तमिलनाडु में टीवीके चीफ विजय की सरकार के विश्वासमत से पहले AIADMK में बगावत हो गई है। पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के पलानीस्वामी के खिलाफ विधायकों के एक बड़े समूह ने बगावत करते हुए विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार को अपना खुला समर्थन देने की घोषणा कर दी है। वहीं AIADMK की ओर से व्हिप जारी कर दिया गया है। AIADMK सांसद I.S. Inbadurai ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि जो भी पार्टी व्हिप का उल्लंघन करेगा उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा और दलबदल कानून के तहत कार्रवाई होगी। बता दें कि टीवीके सरकार बुधवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी।

व्हिप के खिलाफ जाने वालों पर होगा एक्शन

AIADMK सांसद I.S. Inbadurai ने लिखा, "AIADMK के महासचिव और विधायी दल के नेता, EPS ने आधिकारिक व्हिप नियुक्त किया है। AIADMK का कोई भी विधानसभा सदस्य जो इस व्हिप द्वारा जारी आदेशों का उल्लंघन करता है, वह निस्संदेह संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून के अधीन होगा। विधानसभा में सरकार के खिलाफ विश्वास मत के दौरान, यदि कोई सदस्य पार्टी के आधिकारिक व्हिप निर्देश के खिलाफ वोट देता है, वोट में भाग लेने से दूर रहता है, या तटस्थ रहता है, तो इसे दलबदल माना जाएगा। कोई भी व्यक्ति केवल इसलिए अलग व्हिप नियुक्त नहीं कर सकता क्योंकि वे एक अलग समूह के रूप में काम कर रहे हैं या यह दावा कर रहे हैं कि अधिकांश विधायक उनका समर्थन करते हैं। ऐसा कोई भी कार्य कानूनी रूप से अमान्य होगा। इसलिए, यदि AIADMK के किसी भी विधायक के खिलाफ, जो AIADMK के आधिकारिक व्हिप निर्देश का उल्लंघन करता है, दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की कार्यवाही शुरू की जाती है, तो उस विधायक का पद समाप्त हो जाएगा, यही कानूनी स्थिति है!"

30 विधायकों के बागी गुट में होने की संभावना

अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता एस.पी.वेलुमणि और सी.वे.षणमुगम के नेतृत्व में लगभग 30 विधायकों के बागी गुट में होने की संभावना है। इस गुट ने 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। इन चुनावों में अन्नाद्रमुक ने जिन 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था, उनमें से वह केवल 47 सीटें ही जीतने में सफल रही थी। षणमुगम ने पत्रकारों से कहा कि वे विजय से मिलकर उनकी सरकार को समर्थन देने के लिए पत्र सौंपेंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पार्टी के महासचिव पलानीस्वामी द्रमुक के समर्थन से सरकार बनाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक का गठन ही द्रमुक के विरोध और 'सफाये' के लिए हुआ है। 

AIAKMK में अंदरुनी कलह चरम पर

उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सदस्यों ने एम के स्टालिन की अगुवाई वाली पार्टी के समर्थन से सरकार बनाने के पलानीस्वामी के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव अन्नाद्रमुक के मूलभूत सिद्धांतों के विपरीत है क्योंकि इसका गठन ही द्रमुक का विरोध करने और उसे 'जड़ से उखाड़ने' के लिए किया गया था। अन्नाद्रमुक नेतृत्व ने इन आरोपों को 'अफवाह' बताकर खारिज कर दिया है। अन्नाद्रमुक ने 'एक्स' पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि वेलुमणि, षणमुगम और सी विजयभास्कर खुद टीवीके सरकार में मंत्री पद पाने की कोशिश कर रहे हैं। इसने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ता पलानीस्वामी के साथ मजबूती से खड़े हैं तथा गठबंधन के फैसले मुट्ठी भर विधायकों द्वारा नहीं लिए जा सकते। 

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